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Monday, August 8, 2011

संवेदना की अर्थी No Feelings Left In Metros

कल बस से कटा था एक हाथ,
कराहता रहा वो,
तड़पता रहा वो
कईं घंटे
एक मेट्रो शहर में-
हिन्दुस्तान का दिल कहते हैं हम जिसे!!

आज कार चलाते एक शख्स ने
टक्कर मार दी गाय को,
और पलट कर भी न देखा-
श्राद्ध पर रोटी खिलाने के लिये
गाय ढूँढेगा
तब शायद याद आ जाये
इस बेज़ुबान की-
माँ का दर्जा दिया है हमने जिसे!!

सड़क किनारे  पड़े पड़े
लाश बन गया है एक शरीर-
जिसे ठोकर मारते हुए
चल पड़ी है दुनिया
तरक्की की राह पर,
विश्व का
नम्बर एक बनने की चाह लिये

कहते हैं ये शहर नहीं सोता
पर हाँ
आँखें जरूर मूँद लेता है
पीड़ा देख नहीं सकता पगला!!

लाशें चीख रही हैं-
समय की माँग है-
संवेदना की
अर्थी पर रोने के लिये
रूदालियों को बुलाया जाये!!!
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Thursday, March 17, 2011

शहर धुँए में कैद है Shahar Dhuey Mein Qaid Hai - Poem

शहर धुँए में कैद है
दम घुट रहा है....
पर दुनिया की सबसे बड़ी
प्रदूषण - रहित बस सेवा
चलाने वाले इस शहर के पास
इस धुँए से बचने के लिये
कोई सी.एन.जी नहीं !!!

यहाँ दिन-दहाड़े कत्ल होता है
इन्सानियत का....
जो पैदा करता है जेसिकायें व राधिकायें
और रोज़ सहम जाता है शहर..
"रे बैन" का काला चश्मा लगा कर
घूमते हैं लोग...
नज़र चुराते हैं दूध पी रही बिल्ली की तरह..
जैसे कुछ दिख ही नहीं रहा हो
उस रंगीन चश्मे के पीछे...

फ़ुटऑवर ब्रिज और फ़्लाईऑवरों
से गुजरते वाहन..लोग...
तोड़ते हैं उम्मीदों का पुल..
मनों में घोला जाता है "तारकोल"
और रौंदी जाती हैं खुशियाँ
"रोडरोलर" के तले...
और तैयार हो जाती है ईर्ष्या व द्वेष
की एक मज़बूत सड़क..

"विकसित" देशों में शामिल होने की चाह लिये...
हर दिन होता है मानवता का खून...
रोज़ बढ़ाते हैं हम सीने में जल रही
उस आग का जी.डी.पी...
उसी "आग" के धुँए में घुट रहा है
"नैशनल क्राइम कैपिटल"
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Saturday, November 27, 2010

क्या आप जानते हैं भाग-१- दिल्ली का नाम कैसे पड़ा और २६ नवम्बर क्यों है खास? (माइक्रोपोस्ट) Name of Delhi and Significance of 26 November

"गुस्ताखियाँ हाजिर हैं" की शुरुआत के बाद आज से धूप-छाँव पर आ रहा है एक और नियमित स्तम्भ- "क्या आप जानते हैं"?

"क्या आप जानते हैं"  के छोटे से स्तम्भ में लम्बा-चौड़ा लेख नहीं अपितु आप के लिये होगी रोचक एवं ज्ञानवर्धक जानकारी। चाहें इतिहास हो, विज्ञान, भूगोल, घर्म या अन्य कोई भी और विषय हो। यदि आप भी इन विषयों के बारे में कोई जानकारी बाँटना चाहें तो कमेंट अथवा ईमेल के जरिये जरूर सम्पर्क करें। 

दिल्ली का नाम कैसे पड़ा?


भारत की राजधानी है दिल्ली। मीडिया वाले कभी इसे दिल वालों की दिल्ली तो कभी दरिंदों की दिल्ली कहकर बुलाते हैं। इसका इतिहास आज से पाँच हजार पहले पांडवों के समय का बताते हैं जब ये पांडवों की राजधानी हुआ करती थी और इसका नाम इंद्रप्रस्थ हुआ करता था। हम ये भी जानते हैं कि अंग्रेजों ने कलकत्ता के बाद 1911 में दिल्ली को अपनी राजधानी बनाया। पर क्या आप जानते हैं दिल्ली का नाम कैसे "दिल्ली" पड़ा कैसे?

दरअसल दिल्ली का नाम कैसे पड़ा इस बारे में कईं तरह की कहानियाँ हैं। ज्यादातर इतिहासकारों का मानना है कि वर्ष 50 ईसा पूर्व (BC) में मौर्य राजा हुआ करते थे धिल्लु या दिलु। उन्होंने इस शहर का निर्माण किया और इसका नाम दिल्ली पड़ गया। कुछ कहते हैं कि तोमरवंश के राजा ने इस जगह का नाम "ढीली" रखा क्योंकि राजा धव का बनाया हुआ लोहे का खम्बा कमजोर था और उसको बदला गया। यही "ढीली" शब्द बाद में बदल का दिल्ली हो गया। तोमरवंश  के दौरान जिन सिक्कों की परम्परा थी उन्हें "देहलीवाल" कहा करते थे। तो कुछ जानकार दिल्ली को "दहलीज़" का अपभ्रंश मानते हैं। क्योंकि गंगा की शुरुआत इसी "दहलीज़" से होती है यानि दिल्ली के बाद होती है। कुछ का मानना है कि दिल्ली का नाम पहले धिल्लिका था।

मतलब यह कि जिस दिल्ली को आप और मैं जानते  हैं उसका इतिहास इतना पुराना है कि उसका असली नाम अब कोई नहीं जानता। दिल्ली को "इंद्रप्रस्थ" बुलाये जाने के बारे में आप लोगों का क्या ख्याल है?

२६ नवम्बर क्यॊं है हमारे लिये खास?

२६ नवम्बर २००८ को पाकिस्तानी आतंकियों ने मुम्बई पर हमला किया। उसके बाद से हमारी सरकार यही राग अलाप रही है कि पाकिस्तान को नहीं छोड़ेंगे। अब इस पाकिस्तानी राग की आदत सी पड़ गई है। नये नये मुख्यमंत्री  पृथ्वीराज चौहाण राष्ट्रगान के दौरान वहाँ से चले जाते हैं तो आप समझ सकते हैं कि कितना गम्भीर होकर हमारे राजनेता काम कर रहे हैं और कितना राष्ट्रप्रेम उनके मन में है।

खैर इस २६ नवम्बर को सभी जानते हैं पर एक और २६ नवम्बर हमारे लिये अहम है। 1949 में इसी दिन हमारा संविधान बनकर तैयार हुआ था जो २६ जनवरी 1950 से लागू किया गया।

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