Thursday, November 4, 2010

दीपावली पर बाल-मन की कविता Children Poem on Diwali Festival

छोटे बच्चे प्रणव गौड़ द्वारा दीपावली के त्यौहार पर रचित यह बाल-कविता।
प्रणव (कुश) कुलाची हंसराज स्कूल, दिल्ली में तीसरी कक्षा में पढ़ते हैं और इन्हें शतरंज खेलने का शौक है। इनकी बाल-कवितायें बाल उद्यान पर प्रकाशित होती रही हैं।

दीपों का त्योहार दीवाली।
खुशियों का त्योहार दीवाली॥

वनवास पूरा कर आये श्रीराम।
अयोध्या के मन भाये श्रीराम।।

घर-घर सजे , सजे हैं आँगन।
जलते पटाखे, फ़ुलझड़ियाँ  बम।।

लक्ष्मी गणेश का पूजन करें लोग।
लड्डुओं का लगता है भोग॥

पहनें नये कपड़े, खिलाते है मिठाई ।
देखो देखो दीपावली आई॥

अन्य कवितायें:
इंद्रधनुष- कविता और पेंटिंग
प्रणव गौड़ 'कुश' की होली
गणतंत्र दिवस पर चली छोटी कूची
किस्मस ट्री की पेंटिंग
चाचा नेहरू कक्षा 1 के एक छात्र की दृष्टि में
दिवाली पर एक बच्चे द्वारा बना चित्र

2 comments:

सुरेन्द्र बहादुर सिंह " झंझट गोंडवी " said...

ppyari si kavita
happy deewali

Sukhmangal Singh said...

"दीवाली आई है "
सुनो गांव पुर देश .दीवाली आई है |
राम अवधपुर अवधेश,अवध बधाई है ||
सरयू क लहरें धीर, धरनि चमकाई है |
करुणा सिंधु ! बुद्धि की जी बीरताई है||
चारहु दिसि श्रृंगार ,सखी गुण गए हैं |
क्रीड़ा- कल्लोल शारद वीणा बजाई हैं ||