Tuesday, December 13, 2011

वैदिक गणित की एक नई श्रूंख्ला - भाग एक Vedic Mathematics Series - Learn Un-Conventional ways of Multiplication Division

भारत का इतिहास व इसकी सभ्यता सबसे प्राचीन सभ्यताओं में से एक मानी जाती है। कोई वस्तु जितनी पुरानी होती जाती है उतने ही उसके टूटने व खराब होने के आसार बढ़ते जाते हैं। परन्तु आज भी भारत यदि अपने स्वाभिमान के साथ टिका हुआ है तो उसका कारण इस देश का इतिहास ही है। जब हम देखते हैं पश्चिम के लोग आध्यात्मिकता के लिये भारत का रूख करते हैं तो गर्व का अनुभव होता है। आध्यात्मिकता ही आज एकमात्र रास्ता है पृथ्वी व विश्व के टिके रहने का। हिन्दू धर्म में आध्यात्मिकता की जो बातें हैं व सीख है उससे पूरा विश्व आकर्षित होता है। भारतीय इतिहास ने राम व कृष्ण को देखा है जो मर्यादा में भी रहते हैं और आदि व अनन्त का रहस्य भी बताते हैं। हमने चरक व सुश्रुत को भी देखा है जिन्होंने शल्य चिकित्सा यानि चीरफ़ाड़ के ऑप्रेशन में महारत हासिल की। आज की भाषा में बात करूँ तो वे उस समय के बहुत बड़े सर्जन थे। हजारों वर्ष पूर्व के सर्जन!! हमने वीर शिवाजी को देखा है, हमने लक्ष्मी बाई जैसी वीरांगना को भी देखा जो महज तेईस बरस में अंग्रेजों को दाँतों तले उंगलियाँ दबाने पर मजबूर किया। हमने भगत सिंह को देखा, हमने मोहनदास करमचंद गाँधी को भी देखा, हमने स्वामी दयानन्द व राजा राम मोहन राय को देखा जिन्होंने हिन्दू धर्म की कुरीतियों को दूर करने का प्रयास किया। ऐसा ही शायद ही किसी धर्म में होता हो जब वे स्वयं अपनी गलतियों से सीखें व उसे सुधारने का प्रयास करें। ऐसे साधुओं को मेरा प्रणाम। हमने कभी किसी देश पर आक्रमण नहीं किया। मुगलों, तुगलकों, लोदियों व अंग्रेज़ों का डटकर सामना किया।

हमारे देश में गर्व करने के लिये व सीखने के लिये इतना सब कुछ है फिर भी जब हम पश्चिम का मुँह ताकते हैं तो हैरानी होती है। दरअसल बात यह है कि हम अपना इतिहास भूल चुके हैं। या यूँ कहें कि इतिहास जानते ही नहीं। बराक ओबामा जब कहते हैं आज का विज्ञान भारत के इतिहास में दिये गये वैज्ञानिक उपलब्धियों पर टिका हुआ है तो यह कोई अतिश्योक्ति नहीं है। हमने शून्य दिया इस पर हमें गर्व होना चाहिये। जब हमने चिकिसा प्रणाली दी तब गर्व होना चाहिये। जब हमने Trigonometry का सिद्धांत दिया तब गर्व होना चाहिये। मैंने जब नारद पुराण के कुछ पन्ने पलटे तो मैं दंग रह गया कि उसमें ज्योतिष सिखाया गया है और उसमें Trigonometry की Pythagoras Theorem भी है और Heights & Distances के उदाहरण भी। हमें अपने वेदों व उपनिषदों पर गर्व होना चाहिये जिन्होंने आज के विज्ञान की नींव रखी। हमें अपने पूर्वजों पर गर्व होना चाहिये। हमें गीता पर गर्व होना चाहिये जो आज के आध्यात्मिकता की नींव है।

आज से धूप छाँव पर वैदिक गणित का आरम्भ कर रहा हूँ। मैंने अभी हाल ही में इसे पढ़ना शुरू किया और मैं शुरू के कुछ पन्ने पढ़ कर ही हैरान हो गया हूँ। मैं चाहता हूँ कि इस बेहतरीन तकनीक को सभी के साथ बाँटा जाये और सरकार से बार बार अनुरोध करूँगा कि छोटे बच्चों को इसकी शिक्षा दी जाये। ये विदेशी तकनीकों से बिल्कुल अलग है और बेहद सरल है। इसके किसी भी Calculation के लिये आपको केवल पाँच तक का ही पहाड़ा (Table) आने की जरूरत है।

वैदिक गणित सोलह सूत्रों से बना है।

आज एक उदाहरण से इस श्रृंख्ला का प्रारम्भ कर रहा हूँ।

मान लीजिये आपको 8 x 7 निकालना है।
आप कहेंगे कि इसका जवाब 56 है। बिल्कुल सही। लेकिन जैसा कि मैंने पहले कहा कि केवल 5 तक का ही Table आने की आवश्यकता है।

8 और 10 में 2 का अंतर है व 7 और 10 में 3 का अंतर है। इन्हें कुछ इस तरह से लिखें:

8   -  2
7   -  3

अब 8 में से 3 को (8-3 = 5)या फिर 7 में से 2 (7 - 2 = 5) को घटायें।
और 2 * 3 निकालें...(2*3=6)  और कुछ इस तरह से लिखें:

8 2
7 3
(8-3)     (2*3)
5 6

जवाब आपके सामने है: 56

इसी तरह से
7 x 6 = 42

7 3
6 4
(6-3)         (3*4)
3 12 (अब इसमें से 1 को 3 में जोड़ें)

उत्तर : 42


इसे आप 100 के Base तक ले जा सकते हैं.. मसलन
99 * 88

99 1
88 12

(88-1) (1*12)
87 12

= 8712

इस प्रश्न का उत्तर निकालने के लिये आपको ज्यादा से ज्यादा 5 सेकंड लगेंगे... वहीं यदि आप किताबी तरीके से इसका उत्तर निकालने का प्रयास करें तो??? शर्त लगा सकता हूँ तीन से चार गुना अधिक समय लगेगा..
जो आपने ऊपर सूत्र जाना है वह है निखिलं नवतश्चरम दशत: । जगद्गुरू स्वामी श्री भारती कृष्ण तीर्थ जी महाराज (1884-1960) का धन्यवाद जिन्होंने वैदिक गणित को सोलह सूत्रों में पिरो कर हम तक पहुँचाया है।

यह तो अभी शुरूआत है। जैसे जैसे मैं आगे के पन्ने पढूँगा मैं आपके साथ बाँटता रहूँगा।

जय हिन्द
वन्देमातरम
जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गदापि गरीयसी।

16 comments:

प्रभात शारदा said...

How do we know which diagonal should we proceed? In first example, you go from left-top to right-bottom. Whereas in other examples, you go from left-bottom to right top?

Additionally, you have added 12 in first case and in third case you have not do the same? How do we make sure that need to add the output or not?

प्रभात शारदा said...

I got the answers...but still like if share your views too..

तपन शर्मा said...

चाहें किसी भी Diagonal से subtract करें, नतीजा एक ही होगा...
इससे भी आसान तरीके आगे इंतज़ार कर रहें हैं.. :-)

Abhishek said...

multiply
73 * 77

can it be fast??

तपन शर्मा said...

बिल्कुल हो सकता है पर अभी मुझे नहीं पता है.. जैसे ही पता चलता है मैं बताता हूँ.

तपन शर्मा said...

Urdhva-Triyak Method can solve this multiplication. Will discuss this is next post.

Abhishek Kumar said...

Really too good and helpful

surendra prajapati said...

Very very nice

MUKESH said...

Sir kya swami ji ki ye book hindi language main hai ?

Naveen kumar said...

kya koi mujhe ye book de sakta haii ,,please.please ,please

Anil said...

Jab ikai Ke dono ank ek jase ho and dahai Ke anko Ka yog 10 ho tab
3x7=21
Just add 1 in ikai like 1+7x7=56 ans is 5621
5621

R.K Agrahari said...

बहुत बढ़िया प्रयाश हम वास्तव मे अपने इतिहास को भूल चुके हैं जिसका श्रेय आजादी के बाद सत्तारूढ़ शासकों का हैं जो तुष्टीकरण नीति के कारण प्रचीन ग्रंथों को या उनके भागों को पाठ्यक्रम में सम्मिलित नहीँ किया गया..ऐसे में आप द्वारा किया जाने वाला प्रयाश सराहनीय हैं,

R.K Agrahari said...

बहुत बढ़िया प्रयाश हम वास्तव मे अपने इतिहास को भूल चुके हैं जिसका श्रेय आजादी के बाद सत्तारूढ़ शासकों का हैं जो तुष्टीकरण नीति के कारण प्रचीन ग्रंथों को या उनके भागों को पाठ्यक्रम में सम्मिलित नहीँ किया गया..ऐसे में आप द्वारा किया जाने वाला प्रयाश सराहनीय हैं,

deo alok said...

Dhanyawad anil ji

Amit Saxena said...
This comment has been removed by the author.
Amit Saxena said...

यह बहुत अच्छा प्रयास किया गया है दुनिया की सबसे प्राचीनतम गणित वीधी को जानने का

एक और सरल बिधि:-गुणा को इस प्रकार भी किया जा सक्ता है
99*88=8712
यहा पर 100 को अधार मानेगे और निम्न प्रकार से लिखेगे:--
99 88
1 12 (क्योकि 100-99=1 और 100-88=12)
अब (88-1=87) या(99-12=87) (1*12)
कोइ भी एक सरल संख्या को घटाये‍गे(जैसे 88 मे से 1 घटाना ज्यादा सरल है) और उसे पहिले लिखेगें फिर difference(या संख्या मे कितना जोडा जाये की बो 100 बन जाये उस अन्तर की संख्याओ को गुणा करेंगे) का गुणन फल किखेगें
(88-1)(1*12)
यानि 87 12
उत्तर =8712