Wednesday, November 2, 2011

क्या आप जानते हैं अब तक के सबसे निर्मम हत्याकांड के बारे में? Passenger Pigeon Extinction Story

कहते हैं कि भगवान ने इस धरती पर सबसे समझदार जीव जो बनाया है वो है इंसान। पर आज जो मैं आपसे कहने जा रहा हूँ वो आपको अंदर तक झकझोर सकती है। यदि किसी भी पढ़ने वाले में थोड़ा सा भी दिल होगा तो आज का यह लेख आपको सकते में डाल सकता है। मैं चाहता हूँ कि आप इस लेख को ध्यान से पढ़ें।

चित्रों में मुसाफ़िर कबूतर
मानव जाति के प्रारम्भ से लेकर अब तक का सबसे निर्मम हत्याकांड मैं आज आपके समक्ष रख रहा हूँ। अब तक का सबसे निर्मम हत्याकांड.. एक "समझदार (?)" व सामाजिक (?) जीव कितना निर्दयी हो सकता है, कितना आसामाजिक है व इस धरती का सबसे शक्तिशाली जीव होने का किस तरह से फ़ायदा उठाया है ये आपको आज पता चलेगा। हम बेज़ुबान जानवरों व पक्षियों पर किस तरह से अत्याचार करते हैं उसका नमूना आज पेश करूँगा। मैं अपने लेख को सनसनीखेज़ करने के लिये ऐसा नहीं कर रहा हूँ.. मैं कोई टीवी पर टीआरपी बढ़ाने के लिये नहीं ऐसा कह रहा हूँ.. अपितु सच..सच और केवल सच...

क्या आपने मुसाफ़िर कबूतरों का नाम सुना है? ऑल इंडिया रेडियो पर मैंने अक्टूबर में इनके बारे में सुना। वो ऐसी जानकारी थी जिसने मेरे होश उड़ा दिया। विकिपीडिया व नेट पर खोजा तो बात 
मुसाफ़िर कबूतर का बच्चा
बिल्कुल सच थी। वही बात मैं आपके साथ बाँट रहा हूँ। उत्तरी अमरीका व कनाडा के पूर्वी हिस्से में आज से सौ साल पहले तक मुसाफ़िर कबूतर जिन्हें अंग्रेज़ी में Passenger Pigeon कहते हैं, पाये जाते थे।

क्या आप जानते हैं इनकी संख्या कितनी थी? पाँच सौ करोड़.... जी हाँ आपने सही पढ़ा.. पाँच सौ करोड़। ये पक्षी इसी हिस्से उड़ा करते थे। कहते हैं कि जब ये झुंड में उड़ा करते थे तब एक मील चौड़ा और 300 मील लम्बा झुंड बन जाता था....एक ऐसा झुंड जो सूर्य की किरणों को ढँक लेता था और धरती पर एक किरण भी नहीं पड़ने देता था। जब वे उड़ते थे तो ऐसा अँधेरा छा जाता था जिसे छँटने में चौदह घंटे से ज्यादा समय लग जाता था। चौदह घंटे तक आसमान में अँधेरा.. जैसे सूर्य ग्रहण लग गया हो.. ज़रा सोच कर देखिये.. पाँच सौ करोड़ पक्षी एक साथ आकाश में उड़ते हुए....

सिनसिनाती के चिड़ियाघर में मरने वाला अंतिम कबूतर
आज मुसाफ़िर कबूतरों की संख्या है शून्य... शून्य। कारण- जब यूरोप से लोगों का आगमन तेज़ हुआ और वे अपने रहने के लिये जगह बनाने लगे तब इन पक्षियों के जंगल काटे गये। 19वीं शताब्दी में गुलामों के लिये इन कबूतरों का सस्ता माँस मिलने लगा था। यह वो दौर था जब इनके घरौंदों को तेज़ी से तोड़ा व इन्हें काटा जाने लगा था। 1800 से 1870 तक इनका आँकड़ा धीरे धीरे कम हो रहा था किन्तु 1890 आते आते ये इतनी तेज़ी से विलुप्त हो गये कि पता ही नहीं चला। सिनसिनाटी चिड़ियाघर में 1 सितम्बर , 1914 को अंतिम पक्षी ने दम तोड़ दिया। यानि करीबन सौ वर्षों में पाँच सौ करोड़ मौतें....

इस सत्य घटना में आपको परेशान कर सकती है..आपके रौंगटे खड़े कर सकती है.. आपको दु:खी कर सकती है.. आपको शर्मिंदा कर सकती है..। जैसे मैं हूँ। मुझे जब इस घटना का पता चला तो मैं शर्मिंदा था स्वयं पर.. मानव जाति पर...अपने स्वार्थ व स्वाद हेतु कितना गिर सकता है इंसान इसका उदाहरण है यह घटना...इसके आगे मैं कुछ नहीं कह सकता.. स्तब्ध...

भारत से विलुप्त होने के कागार पर खड़ी हैं अन्य कुछ प्रजातियाँ भी..

साभार:
http://en.wikipedia.org/wiki/Passenger_Pigeon
http://www.eco-action.org/dt/pigeon.html

जय हिन्द
वन्देमातरम

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